87 साल की उम्र में साउथ फिल्म इंडस्ट्री की दिग्गज अभिनेत्री saroja devi का निधन, उन्होंने अपने करियर में 200 से ज्यादा फिल्मों में काम कर भारतीय सिनेमा में अमिट छाप छोड़ी। ‘अभिनय सरस्वती’ और ‘कन्नड़थु पैंगिली’ के नाम से भी थीं प्रसिद्ध।
भारतीय सिनेमा, खासकर दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लिए आज का दिन बेहद दुखद है। प्रसिद्ध अभिनेत्री saroja devi का लंबी बीमारी के चलते 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। बेंगलुरु के मल्लेश्वरम स्थित अपने निवास स्थान पर उन्होंने अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि वे पिछले कुछ समय से उम्रजनित बीमारियों से जूझ रही थीं। उनके निधन से भारतीय सिनेमा के एक स्वर्णिम युग का पटाक्षेप हो गया है।
saroja devi को कन्नड़ सिनेमा की पहली सुपरस्टार कहा जाता है। 1955 में आई फिल्म ‘महाकवि कालिदास’ से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी और उसके बाद तमिल, तेलुगु और हिंदी सिनेमा में भी उन्होंने अपने अभिनय का लोहा मनवाया। वे चारों भाषाओं में लगभग 200 से अधिक फिल्मों में नजर आईं। अभिनय जगत में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री (1969) और पद्मभूषण (1992) से सम्मानित किया था।
saroja devi के अभिनय की खास बात थी उनका सहज अभिनय और प्रभावशाली स्क्रीन प्रजेंस। दक्षिण भारतीय सिनेमा में उन्हें ‘अभिनय सरस्वती’ और ‘कन्नडथु पैंगिली’ (कन्नड़ की बुलबुल) जैसे सम्मानित उपनामों से जाना जाता था। 1960 के दशक में वे दक्षिण भारत की महिलाओं के लिए फैशन आइकन बन चुकी थीं। उनकी साड़ियों, गहनों और हेयरस्टाइल की खूब नकल की जाती थी।
तमिल फिल्म इंडस्ट्री में saroja devi को एमजी रामचंद्रन (एमजीआर) और शिवाजी गणेशन के साथ की गई उनकी फिल्मों के लिए आज भी याद किया जाता है। एमजीआर के साथ उन्होंने करीब 26 फिल्मों में काम किया और शिवाजी गणेशन के साथ भी 22 फिल्मों में नजर आईं। एमजीआर उन्हें अपनी ‘लकी मैस्कॉट’ मानते थे। तमिल सिनेमा में ‘नाडोडी मन्नन’ जैसी फिल्मों से उन्हें जबरदस्त लोकप्रियता मिली।
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तेलुगु सिनेमा में भी saroja devi ने बड़ी-बड़ी हिट फिल्में दीं। एनटी रामाराव जैसे दिग्गज अभिनेताओं के साथ उन्होंने कई यादगार फिल्में कीं, जिनमें ‘भग्यचक्रम’, ‘उमा चंडी गौरी शंकरुल कथा’, ‘शकुंतला’ जैसी फिल्में शामिल हैं। वहीं हिंदी फिल्मों में उन्होंने दिलीप कुमार, सुनील दत्त और शम्मी कपूर जैसे बड़े सितारों के साथ काम किया। ‘ससुराल’ और ‘पैग़ाम’ जैसी फिल्मों में उनका अभिनय आज भी दर्शकों के जेहन में ताजा है।
saroja devi के करियर का सबसे अनूठा पहलू यह रहा कि वे लगातार 29 वर्षों तक मुख्य अभिनेत्री के तौर पर फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय रहीं। 1955 से लेकर 1984 के बीच उन्होंने 161 फिल्मों में लीड रोल निभाया। ऐसा कीर्तिमान भारतीय सिनेमा में किसी अन्य अभिनेत्री के नाम दर्ज नहीं है।
शादी के बाद भले ही उन्होंने तमिल सिनेमा से धीरे-धीरे दूरी बना ली हो, लेकिन कन्नड़ फिल्मों में उनका जलवा बरकरार रहा। ‘कित्तूर चेनम्मा’, ‘मल्लम्मना पावाडा’, ‘न्यायवे देवेरु’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को आज भी सराहा जाता है।
कला के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए तमिलनाडु सरकार ने भी उन्हें ‘कलाईमामणि’ अवॉर्ड से नवाजा था। इसके अलावा वे कन्नड़ चलंचित्र संघ की उपाध्यक्ष और तिरुपति देवस्थानम की सलाहकार समिति की सदस्य भी रही थीं। 1998 और 2005 में उन्होंने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की ज्यूरी अध्यक्ष के रूप में भी काम किया था।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि saroja devi का नाम लेते ही ‘कित्तूर चेनम्मा’, ‘बब्रुवाहन’ और ‘अन्नाथांगी’ जैसी क्लासिक फिल्मों की यादें ताजा हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि उनका यूं चला जाना भारतीय सिनेमा के लिए अपूरणीय क्षति है।
saroja devi का अंतिम संस्कार मल्लेश्वरम स्थित उनके निवास से मंगलवार दोपहर 12 बजे संपन्न होगा। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके घर पर ही रखा जाएगा।
फिल्म इंडस्ट्री से लेकर फैंस तक हर कोई saroja devi के योगदान को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। उनका जाना सिर्फ एक अभिनेत्री का नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की उस पीढ़ी का अंत है जिसने कला को व्यवसाय से अधिक साधना माना।
उनकी आखिरी फिल्म 2019 में आई ‘नटसार्वभौम’ थी, जिसमें उन्होंने छोटे लेकिन यादगार रोल के साथ वापसी की थी।
saroja devi, जिनका नाम हर दशक में किसी न किसी यादगार फिल्म से जुड़ा रहा, अब भले ही इस दुनिया में नहीं रहीं, लेकिन उनके अभिनय की छाप भारतीय सिनेमा में अमर रहेगी।
