केरल स्कूलों में U-शेप classroom का ट्रेंड, आनंद महिंद्रा बोले- ‘अब बैकबेंचर कौन रहेगा’

केरल और बंगाल के स्कूलों में अब classroom का माहौल बदल रहा है। पारंपरिक बैकबेंच सिस्टम को हटाकर U-शेप क्लासरूम शुरू हो रहा है, जहां हर छात्र शिक्षक के सामने बैठेगा। आनंद महिंद्रा ने भी इस बदलाव पर अपनी प्रतिक्रिया दी और अपने पुराने स्कूल के दिनों को याद किया।

केरल के स्कूलों ने classroom की पारंपरिक सोच को पूरी तरह बदलने का फैसला किया है। अब यहां बच्चों को पीठ पीछे बैठने का मौका नहीं मिलेगा, क्योंकि हर क्लासरूम में U-शेप यानी अर्धवृत्ताकार बैठकी पद्धती लागू की जा रही है। इस नयी व्यवस्था में शिक्षक कक्षा के बीचों-बीच रहेंगे और सभी छात्र उनके चारों ओर बैठकर पढ़ाई करेंगे। इस बदलाव का उद्देश्य क्लासरूम में समानता और सहभाग सुनिश्चित करना है, ताकि कोई भी विद्यार्थी ‘पीछे बैठने वाला’ न कहलाए।

इस प्रयोग ने बिजनेस टायकून आनंद महिंद्रा तक का ध्यान खींचा। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए लिखा कि बैकबेंच का अपना एक अलग ही रोमांच होता था। उन्होंने यह भी माना कि यह नई व्यवस्था विद्यार्थियों में संतुलित भागीदारी को बढ़ावा देगी। हालांकि वे खुद मानते हैं कि बैकबेंचर्स को कभी-कभी सोचने और कल्पनाओं में खो जाने की आज़ादी मिलती थी, जो अब संभव नहीं रहेगा।

केरल में इस तरह के classroom का आइडिया साल 2024 में आई मलयालम फिल्म ‘स्थानार्थी श्रीकुट्टन‘ से प्रेरित है। सबसे पहले रामविलासम VHSS स्कूल, वलाकॉम ने इसे अपनाया। केरल के परिवहन मंत्री के.बी. गणेश कुमार ने इस फिल्म से प्रेरणा लेकर इसे स्कूल में लागू करवाया। फिल्म के निर्देशक वीनेश विश्वनाथ ने बताया कि अब तक केरल के कम से कम आठ स्कूल और पंजाब का एक स्कूल इस classroom सेटअप को अपना चुके हैं। यह व्यवस्था खासतौर पर इसीलिए अपनाई जा रही है ताकि क्लासरूम में ‘फ्रंटबेंचर’ और ‘बैकबेंचर’ का अंतर ही खत्म हो जाए।

सोशल मीडिया पर इस classroom बदलाव को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे एक अच्छा कदम बता रहे हैं, क्योंकि इससे हर छात्र को बराबरी से शिक्षक के करीब बैठने का अवसर मिलेगा। वहीं, कुछ यूजर्स का मानना है कि पिछली बेंच पर बैठने से जो आज़ादी मिलती थी, वह अब नहीं मिलेगी। साथ ही कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाए हैं कि U-शेप क्लासरूम में गर्दन मोड़कर बैठना बच्चों के लिए शारीरिक रूप से कितना सुविधाजनक रहेगा।

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इस बीच पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के बार्लो गर्ल्स हाई स्कूल ने भी इस प्रयोग को अपनाया है। स्कूल में सातवीं कक्षा की छात्राओं के साथ गणित, इतिहास और वर्क एजुकेशन में यह नया classroom सिस्टम लागू कर तीन दिन तक ट्रायल लिया गया। स्कूल की प्राचार्या दीपास्री मजूमदार ने बताया कि अब सभी 55 छात्राएं शिक्षक के संपर्क में आईं और हर किसी ने सहभागिता दिखाई। उन्होंने माना कि यह नया क्लासरूम मॉडल बच्चों को अधिक आत्मविश्वास देता है और सहभागिता को बढ़ाता है।

राज्य के शिक्षा सचिव शुभ्रा चक्रवर्ती और उप-निदेशक (प्रशासन) चिन्मय सरकार के सुझाव के बाद यह पहल हुई। जिला स्कूल निरीक्षक बनिब्रत दास ने बताया कि मलयालम फिल्म ‘स्थानार्थी श्रीकुट्टन‘ से प्रेरणा लेकर इस classroom बदलाव को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आदर्श क्लासरूम में कोई ‘फ्रंटबेंचर’ या ‘बैकबेंचर’ नहीं होना चाहिए, सभी विद्यार्थी समान होते हैं।

छात्राएं भी इस नई व्यवस्था से काफी खुश नजर आईं। सातवीं कक्षा की छात्रा कृतिका मंडल ने कहा कि जब शिक्षक इतने करीब बैठे तो डर बिल्कुल नहीं लगा और सवाल पूछने की हिम्मत भी आई। वहीं, उसकी सहपाठी अरुषि माली ने इसे ‘मज़ेदार और इंटरएक्टिव’ क्लासरूम बताया।

शिक्षकों का मानना है कि इस तरह का classroom सिस्टम बंगाली माध्यम स्कूलों में घटती हुई छात्रों की संख्या में सुधार ला सकता है। सीधे संपर्क, पास बैठने का माहौल और दोनों तरफ से संवाद से क्लासरूम और अधिक सक्रिय हो जाएगा। यह पारंपरिक क्लासरूम पढ़ाई के तरीके के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

तमिलनाडु सरकार ने भी इस विचार को अपनाते हुए राज्य के सभी मिडिल स्कूलों के classroom में पायलट प्रोजेक्ट के तहत U-शेप बैठकी शुरू करने की घोषणा की है। शिक्षा विभाग ने पहले ही प्राइमरी स्कूलों के लिए यह व्यवस्था लागू कर रखी है। शिक्षा मंत्री अन्बिल महेश पोय्यामोझी के निर्देश पर यह क्लासरूम मॉडल मिडिल स्कूलों में लागू किया जा रहा है, ताकि छात्रों और शिक्षकों के बीच संवाद और सहभागिता बेहतर हो सके।

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हालांकि, कुछ शिक्षकों और अभिभावकों ने classroom में जगह की समस्या को लेकर सवाल उठाए हैं। तमिलनाडु ग्रेजुएट टीचर्स फेडरेशन के महासचिव पी. पैट्रिक रेमंड ने कहा कि 25 से अधिक छात्रों की कक्षाओं में इस क्लासरूम सिस्टम को लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वहीं, शिक्षा विभाग ने माना कि बड़े क्लासरूम में इसे लागू करने के लिए अतिरिक्त दिशा-निर्देशों की जरूरत होगी।

शिक्षाविद् श‍क्तिपद पात्र ने कहा कि यह classroom मॉडल विद्यार्थियों की रूचि फिर से बढ़ा सकता है और छोटे स्कूलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। जहां एक तरफ क्लासरूम का यह नया प्रयोग बच्चों के आत्मविश्वास और संवाद कौशल को बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या हर स्कूल इसे सफलतापूर्वक लागू कर पाएगा?

फिलहाल, यह classroom प्रयोग देशभर में शिक्षा व्यवस्था के भविष्य की दिशा को लेकर बड़ी बहस को जन्म दे चुका है।

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