tata motors share price demerger 400 nse investor updates : भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव मंगलवार को दर्ज हुआ, जब Tata Motors का बहुचर्चित डिमर्जर आधिकारिक रूप से लागू हुआ। इस ऐतिहासिक कदम के तहत कंपनी को दो स्वतंत्र इकाइयों — पैसेंजर व्हीकल्स और कमर्शियल व्हीकल्स — में बांटा गया है। डिमर्जर के बाद टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स का शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर ₹400 प्रति शेयर के भाव पर खुला। इसके साथ ही शेयर बाजार में इस कदम को लेकर जोरदार हलचल देखी गई।
क्या है टाटा मोटर्स का डिमर्जर प्लान
कंपनी ने मार्च 2024 में अपने बोर्ड मीटिंग में यह बड़ा फैसला लिया था कि वह अपने पैसेंजर व्हीकल (PV) और कमर्शियल व्हीकल (CV) कारोबार को दो अलग-अलग लिस्टेड इकाइयों में बांटेगी। इसके तहत पैसेंजर व्हीकल्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और Jaguar Land Rover (JLR) बिजनेस को एक इकाई में रखा गया है, जबकि ट्रक और बस जैसे कमर्शियल व्हीकल कारोबार को अलग कंपनी में ट्रांसफर किया गया है।
इस डिमर्जर स्कीम के मुताबिक, हर निवेशक को 1:1 अनुपात में शेयर दिए जाएंगे। यानी, जिसके पास एक टाटा मोटर्स का शेयर है, उसे उतनी ही संख्या में नई कमर्शियल व्हीकल कंपनी के शेयर भी मिलेंगे। इस प्रक्रिया के लिए 14 अक्टूबर को रिकॉर्ड डेट तय की गई थी, ताकि शेयरहोल्डर्स की पात्रता सुनिश्चित की जा सके।
डिमर्जर के बाद शेयरों में उतार-चढ़ाव
डिमर्जर लागू होते ही कंपनी के पैसेंजर व्हीकल यूनिट का शेयर ₹400 पर खुला और कुछ देर में मामूली गिरावट के साथ ₹391.35 तक पहुंच गया। बीएसई पर भी शेयर ₹399 पर खुला। यह गिरावट बाजार में एडजस्टमेंट के कारण बताई जा रही है। विश्लेषकों का कहना है कि इस डिमर्जर के बाद शुरुआती दिनों में उतार-चढ़ाव रह सकता है, लेकिन लंबे समय में कंपनी को इससे रणनीतिक फायदा होगा।
वैल्यू अनलॉकिंग का बड़ा कदम
टाटा मोटर्स के चेयरमैन Natarajan Chandrasekaran ने कंपनी की 80वीं इंटीग्रेटेड एनुअल रिपोर्ट में कहा था कि यह डिमर्जर कंपनी के लिए “स्ट्रैटेजिक क्लैरिटी और ऑपरेशनल एजिलिटी” लेकर आएगा। उनके मुताबिक, दोनों इकाइयों को अलग करने से कंपनी को निवेश, रणनीति और प्रबंधन में ज्यादा फोकस मिलेगा, जिससे ग्राहकों को बेहतर अनुभव और शेयरधारकों को लंबे समय में ज्यादा रिटर्न मिलेगा।
कौन संभालेगा नई इकाइयों की कमान
डिमर्जर के साथ ही प्रबंधन में भी बदलाव किया गया है। कंपनी ने घोषणा की कि Girish Wagh को कमर्शियल व्हीकल कंपनी (TMLCV) का एमडी और सीईओ बनाया गया है, जबकि Shailesh Chandra पैसेंजर व्हीकल कंपनी (TMPV) की जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं PB Balaji को दोनों इकाइयों के बोर्ड में डायरेक्टर के रूप में शामिल किया गया है। इन नियुक्तियों का असर अक्टूबर 2025 से प्रभावी होगा।
डिमर्जर से निवेशकों को क्या मिलेगा
इस डिमर्जर से पहले जो निवेशक टाटा मोटर्स के शेयर होल्ड कर रहे थे, उन्हें अब नई कमर्शियल व्हीकल कंपनी के भी समान संख्या में शेयर मिलेंगे। ये शेयर नवंबर में बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध होंगे। इसके बाद निवेशकों के पास दो स्वतंत्र और फोकस्ड कंपनियों में हिस्सेदारी होगी — एक पैसेंजर व्हीकल और इलेक्ट्रिक व्हीकल व्यवसाय में और दूसरी कमर्शियल व्हीकल कारोबार में।
शेयर प्राइस में गिरावट को लेकर क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ
डिमर्जर के बाद टाटा मोटर्स के शेयर में आई करीब 5% की गिरावट को विशेषज्ञ ज्यादा गंभीर नहीं मानते। उनका कहना है कि यह केवल तकनीकी एडजस्टमेंट है। मार्केट एक्सपर्ट अविनाश गोरक्षकर ने कहा, “यह विभाजन कंपनी के लिए लंबी अवधि में गेमचेंजर साबित होगा। इससे पैसेंजर और कमर्शियल दोनों इकाइयों को स्वतंत्र रूप से बढ़ने और निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी।”
लॉन्ग टर्म में फायदे की उम्मीद
टाटा मोटर्स का पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट पहले से ही इलेक्ट्रिक वाहनों में अपनी मजबूत उपस्थिति बना चुका है। वहीं JLR ब्रांड भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। दूसरी ओर कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट देश की इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ के साथ तेजी से विस्तार की दिशा में है। इन दोनों कारोबारों को स्वतंत्र रूप से चलाने से कंपनी को फाइनेंशियल और स्ट्रैटेजिक दोनों मोर्चों पर फायदा मिलने की उम्मीद है।
इस तरह Tata Motors का डिमर्जर सिर्फ एक कॉरपोरेट कदम नहीं, बल्कि भारत के ऑटो सेक्टर के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। आने वाले महीनों में निवेशक दोनों नई इकाइयों के प्रदर्शन पर करीबी नजर रखेंगे, और इससे कंपनी के शेयर मूल्य पर दीर्घकालिक असर पड़ने की संभावना है।
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