परदे पर दिलों को जीतने वाला यह अभिनेता अपनी निजी जिंदगी में मोहब्बत की तलाश में भटकता रहा। sanjeev kumar की अधूरी प्रेम कहानियाँ, विशेषकर हेमामालिनी से जुड़ा रिश्ता, एक ऐसे कलाकार की असलियत बयां करती हैं जो प्रेम चाहता था, पर अकेलेपन का शिकार हो गया।
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बॉलीवुड के इतिहास में अगर किसी अभिनेता को प्रतिभा और भावनात्मक गहराई के लिए याद किया जाता है, तो वह हैं sanjeev kumar। फिल्मों में उन्होंने जितना प्रेम पाया, निजी जिंदगी में उन्हें उतना ही दर्द और अकेलापन झेलना पड़ा। उनकी अभिनय क्षमता की जितनी तारीफ हुई, उनकी अधूरी प्रेम कहानियों ने भी उतनी ही सुर्खियाँ बटोरीं। विशेष रूप से हेमामालिनी के साथ उनका रिश्ता एक भावनात्मक मोड़ बन गया, जिसने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी।
‘सीता और गीता’ से शुरू हुई कहानी
1972 में फिल्म ‘सीता और गीता’ की शूटिंग के दौरान sanjeev kumar और हेमामालिनी के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। एक रोमांटिक गाने की शूटिंग के समय दोनों के साथ एक हादसा हुआ, जिसमें वे बाल-बाल बचे। इस हादसे के बाद दोनों एक-दूसरे के और करीब आ गए। बताया जाता है कि जब ट्रॉली फिसलकर खाई की ओर बढ़ रही थी, तब दोनों ने एक-दूसरे की चिंता सबसे पहले की — और यही क्षण उनके रिश्ते की शुरुआत बना।
शादी की बातें और टूटता सपना
इस खूबसूरत रिश्ते ने जल्द ही शादी की दिशा ले ली। sanjeev kumar का परिवार हेमामालिनी का रिश्ता मांगने मद्रास गया। मिठाइयों के डिब्बे और परंपरागत रस्में इस प्रस्ताव का हिस्सा थीं। शुरुआत में सबकुछ ठीक लग रहा था, लेकिन एक शर्त ने सब बदल दिया। हेमामालिनी की मां जय चक्रवर्ती ने साफ कहा कि उनकी बेटी शादी के बाद भी फिल्मों में काम करती रहेगी। वहीं, Sanjeev Kumar और उनके परिवार का मानना था कि एक पत्नी को घर पर रहना चाहिए और सास की सेवा करनी चाहिए।
दोनों पक्ष अपनी-अपनी जगह अडिग रहे। हेमामालिनी को उम्मीद थी कि sanjeev kumar अपने विचार बदलेंगे, जबकि संजीव को लगता था कि हेमामालिनी अपनी मां को मना लेंगी। लेकिन कोई नहीं झुका — और यही जिद उनके रिश्ते की दीवार बन गई।
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हेमामालिनी ने कहा था- “एक रूढ़िवादी सोच”
1991 में एक इंटरव्यू में हेमामालिनी ने बताया कि sanjeev kumar एक ऐसी पत्नी चाहते थे जो घर संभाले, मां की देखभाल करे और उनकी सफलता की परछाईं बन कर रहे। उन्होंने कहा, “वो समय ऐसा था जब फिल्मों में काम करने वाली महिलाओं को आसानी से स्वीकार नहीं किया जाता था।” हालांकि, इस सोच को हेमामालिनी और उनकी मां ने स्वीकार नहीं किया।
बाद में हेमामालिनी ने धर्मेंद्र से शादी की और एक खुशहाल परिवार बनाया। लेकिन sanjeev kumar अकेले रह गए, न कभी शादी की और न ही किसी रिश्ते में स्थायी सुख पाया।
एक अधूरी मोहब्बत, कई टूटी कहानियाँ
हेमामालिनी के अलावा भी sanjeev kumar का नाम शबाना आज़मी, सुलक्षणा पंडित और जयंती जैसी कई अभिनेत्रियों से जुड़ा। शबाना आज़मी के साथ वे शादी करना चाहते थे, लेकिन उनकी मां इस रिश्ते के खिलाफ थीं क्योंकि शबाना मुस्लिम थीं। वहीं, सुलक्षणा पंडित ने उनसे शादी की पेशकश की थी, जिसे संजीव ने ठुकरा दिया क्योंकि उनका दिल अब भी हेमामालिनी के लिए धड़कता था। सुलक्षणा ने इसके बाद कभी शादी नहीं की।
एक इंटरव्यू में अभिनेत्री अंजू महेंद्रू ने बताया कि sanjeev kumar अपने प्रेम संबंधों को नाम देने की बजाय उन्हें नंबर दिया करते थे — जैसे “नंबर 3 ने फोन किया” या “नंबर 9 का ऐसा रिएक्शन था।” यह आदत उनके अकेलेपन और असुरक्षा की गवाही देती है।
भरोसे की कमी और अंतहीन अकेलापन
जिंदगी के अंतिम वर्षों में sanjeev kumar को यह डर सताने लगा था कि औरतें सिर्फ उनके पैसे की वजह से उनसे जुड़ना चाहती हैं। उनके करीबी लोग बताते हैं कि उन्होंने खुद को तन्हाई में डुबो दिया था — न कोई जीवनसाथी, न अपना घर। उन्होंने एक घर खरीदने की कोशिश की थी, लेकिन कानूनी विवादों के कारण वह सपना भी अधूरा रह गया।
sanjeev kumar वक्त से पहले अलविदा
खाने-पीने और शराब के शौकीन sanjeev kumar को दिल की बीमारी ने घेर लिया था। एक समय उन्होंने शराब छोड़ दी थी और बाहर जाना भी बंद कर दिया था। उन्हें यह आभास था कि उनके परिवार में पुरुष ज़्यादा उम्र तक नहीं जीते। और सच में, 1985 में मात्र 47 वर्ष की उम्र में हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया।
एक कलाकार, जो परदे पर जीवंत था लेकिन निजी जिंदगी में अधूरा
sanjeev kumar की जिंदगी एक फिल्म जैसी रही — शानदार अभिनय, अद्भुत सफलता, लेकिन दिल टूटने की अनगिनत कहानियाँ। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि ग्लैमर की दुनिया के पीछे अक्सर दर्द की कहानियाँ छिपी होती हैं।
आज जब हम sanjeev kumar की फिल्मों को देखते हैं, तो उनकी गहराई और संवेदनशीलता समझ आती है — शायद इसीलिए, क्योंकि वे खुद भीतर से टूटे हुए थे। लेकिन वे हर किरदार में जान डाल देते थे, और यही वजह है कि आज भी वो लाखों दिलों में ज़िंदा हैं।
