आमिर खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म sitare zameen par को सेंसर बोर्ड ने रिलीज से पहले कुछ महत्वपूर्ण बदलावों के साथ पास किया है। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक उद्धरण शामिल करना और ‘कमल’ शब्द को हटाना जैसे बदलाव प्रमुख हैं।
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बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान की फिल्म sitare zameen par आखिरकार शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है, लेकिन इससे पहले यह फिल्म केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की कड़ी नजर से होकर गुज़री। सेंसर बोर्ड ने फिल्म में कुल पांच अहम बदलाव सुझाए थे, जिन्हें निर्माता आमिर खान फिल्म्स LLP ने स्वीकार भी कर लिया है।
फिल्म को U/A सर्टिफिकेट जारी किया गया है, जो दर्शकों के सभी वर्गों के लिए उपयुक्त माना जाता है। हालांकि, 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यह फिल्म माता-पिता की निगरानी में देखने की सलाह दी गई है। यह सर्टिफिकेट 17 जून को जारी किया गया, जो रिलीज से ठीक तीन दिन पहले था।
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फिल्म ‘sitare zameen par’ में किए गए बदलावों पर एक नज़र
सबसे अहम बदलावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक विचार फिल्म के शुरुआती डिस्क्लेमर में शामिल करना रहा, जिसमें साल 2047 का उल्लेख है – यानी भारत की आज़ादी के 100 साल पूरे होने की कल्पना के तहत राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य को रेखांकित करता है।
इसके अलावा, ‘कमल‘ शब्द को स्क्रीन से और सबटाइटल्स से हटाने का निर्देश दिया गया। माना जा रहा है कि यह निर्णय राजनीतिक प्रतीकों की गैर-उपयुक्तता के संदर्भ में लिया गया है, हालांकि सेंसर बोर्ड ने इसकी स्पष्ट वजह नहीं बताई।
एक अन्य बदलाव में ‘बिजनेस वुमन’ शब्द को बदलकर ‘बिजनेस पर्सन’ कर दिया गया है, ताकि लिंग-तटस्थता बनी रहे।
फिल्म की शुरुआत में पहले जो 30-सेकंड का डिस्क्लेमर था, उसे अब हटाकर 26-सेकंड का वॉयसओवर जोड़ा गया है, जो संभवतः तकनीकी व रचनात्मक दृष्टि से अधिक उपयुक्त पाया गया।
इसके अतिरिक्त, एक दृश्य में ‘माइकल जैक्सन’ का संदर्भ था, जिसे बदलकर अब ‘लवबर्ड्स’ कर दिया गया है – शायद सांस्कृतिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
इन सभी बदलावों की अनुशंसा थिएटर निर्देशक वामन केंद्रे की अगुवाई में बनी रिवाइजिंग कमेटी ने की थी, जो सेंसर बोर्ड की एक विशेष समिति होती है। यह समिति तब गठित की जाती है जब फिल्म के प्रारंभिक निरीक्षण के बाद CBFC अध्यक्ष को लगता है कि इसमें संशोधन की आवश्यकता है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर सितारे ज़मीन पर के निर्माता इन बदलावों के लिए क्यों बाध्य हुए। जब इस संबंध में CBFC प्रमुख राजेंद्र सिंह और समिति अध्यक्ष वामन केंद्रे से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कोई टिप्पणी देने से इनकार कर दिया।
फिल्म ‘सितारे ज़मीन पर’ की कहानी और पृष्ठभूमि
sitare zameen par पर असल में 2018 की स्पैनिश फिल्म Champions का आधिकारिक रीमेक है। साथ ही इसे 2007 की क्लासिक फिल्म तारे ज़मीन पर की आध्यात्मिक अगली कड़ी के रूप में भी देखा जा रहा है।
फिल्म की कहानी एक बास्केटबॉल असिस्टेंट कोच की है, जिसे कोर्ट द्वारा आदेशित सामाजिक सेवा के तहत मानसिक रूप से विशेष पात्र वयस्कों को बास्केटबॉल सिखाने की ज़िम्मेदारी दी जाती है। शुरू में यह ज़िम्मेदारी उसे मजबूरी लगती है, लेकिन धीरे-धीरे यह एक भावनात्मक यात्रा में बदल जाती है।
इस फिल्म का निर्देशन आर. एस. प्रसन्ना ने किया है और मुख्य भूमिकाओं में आमिर खान के साथ अभिनेत्री जेनेलिया डिसूज़ा देशमुख नजर आ रही हैं।
फिल्म को लेकर उत्साह और विवाद साथ-साथ
रिलीज से पहले ही sitare zameen par चर्चाओं में रही – कभी इसकी संवेदनशील कहानी को लेकर, तो कभी सेंसर बोर्ड के इन पांच बदलावों को लेकर। हालांकि, फिल्म ने एक संवेदनशील विषय को मुख्यधारा में लाकर दर्शकों के बीच उम्मीदें जरूर जगा दी हैं।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सितारे ज़मीन पर दर्शकों और समीक्षकों की कसौटी पर कितना खरा उतरती है। एक बात तो तय है – आमिर खान की यह वापसी केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की सोच को भी आगे बढ़ाने वाली है।
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