firozpur : भारत के डीआरडीओ की एंटी-ड्रोन प्रणाली और ऑपरेशन सिंदूर: पाकिस्तान के लिए दोहरी चुनौती

डीआरडीओ द्वारा विकसित डी4 एंटी-ड्रोन प्रणाली ने पाकिस्तान के ड्रोन हमलों को विफल करते हुए भारत की सुरक्षा को मजबूत किया है, जबकि ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के प्रमुख एयरबेस पर सटीक हमले किए हैं। firozpur

भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनावपूर्ण स्थिति में, भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित डी4 एंटी-ड्रोन प्रणाली और भारतीय वायुसेना द्वारा चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर, दोनों ही पाकिस्तान के लिए गंभीर चुनौतियाँ बनकर उभरे हैं।

पाकिस्तान द्वारा पश्चिमी सीमा पर ड्रोन हमलों की बढ़ती घटनाओं के बीच, डीआरडीओ की डी4 प्रणाली ने इन हमलों को विफल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।  यह प्रणाली रडार, रेडियो फ्रीक्वेंसी डिटेक्शन और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल पहचान उपकरणों का उपयोग करके ड्रोन की पहचान और ट्रैकिंग करती है।  इसके बाद, यह रेडियो फ्रीक्वेंसी जैमिंग, जीएनएसएस जैमिंग और जीपीएस स्पूफिंग तकनीकों के माध्यम से ड्रोन को निष्क्रिय करती है।  यदि यह ‘सॉफ्ट किल’ तकनीक विफल होती है, तो ‘हार्ड किल’ के रूप में उच्च ऊर्जा लेजर का उपयोग करके ड्रोन को नष्ट किया जाता है।

डी4 प्रणाली को डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स एंड रडार डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (एलआरडीई), डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (डीईआरएल), सेंटर फॉर हाई एनर्जी सिस्टम्स एंड साइंसेज (सीएचईएसएस) और इंस्ट्रूमेंट्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (आईआरडीई) ने मिलकर विकसित किया है।  यह प्रणाली ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) द्वारा निर्मित की जा रही है।

वहीं, पाकिस्तान के ड्रोन हमलों के जवाब में भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के छह प्रमुख एयरबेस पर सटीक हमले किए हैं।  इनमें रावलपिंडी का चकलाला (नूर खान) एयरबेस, चकवाल का मुरिद एयरबेस, शोरकोट का रफीकी एयरबेस, रहीम यार खान, सुक्कुर और चूनियन शामिल हैं।  इन हमलों में पाकिस्तान के ट्रांसपोर्ट विमानों, ईंधन भरने वाले विमानों और एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम को नुकसान पहुंचा है।  इसके अलावा, रहीम यार खान एयरबेस की रनवे को भी क्षतिग्रस्त किया गया है, जिससे वह अगले कुछ महीनों के लिए संचालन योग्य नहीं रहेगा। firozpur

भारतीय रक्षा सूत्रों के अनुसार, इन हमलों में एयर-लॉन्च प्रिसिजन वेपन्स और फाइटर जेट्स का उपयोग किया गया, जिससे पाकिस्तान की वायुसेना की क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है।  भारत ने इन हमलों के दौरान नागरिक हानि को न्यूनतम रखने का प्रयास किया है।

पाकिस्तान ने इन हमलों के जवाब में ऑपरेशन ‘बुनयान उल मर्सूस’ के तहत भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं, जिसमें पठानकोट और उधमपुर एयरबेस शामिल हैं।  इस संघर्ष में अब तक 60 से अधिक नागरिकों की जान जा चुकी है, और दोनों देशों ने अपनी सीमाओं पर अतिरिक्त बल तैनात किए हैं।

इस बीच, पंजाब सरकार ने भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 51 करोड़ रुपये की लागत से नौ एंटी-ड्रोन सिस्टम स्थापित करने की योजना बनाई है।  इस पहल का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों, विशेषकर फिरोजपुर, अमृतसर और पठानकोट में ड्रोन हमलों की बढ़ती घटनाओं को रोकना है।

भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है।  हालांकि, वर्तमान स्थिति को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष की संभावना बनी हुई है। firozpur

डीआरडीओ की डी4 प्रणाली और ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की रक्षा क्षमताओं को प्रदर्शित किया है, जिससे पाकिस्तान के लिए नई चुनौतियाँ उत्पन्न हुई हैं।  अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश इस तनावपूर्ण स्थिति से कैसे निपटते हैं और क्षेत्रीय शांति की दिशा में क्या कदम उठाते हैं।

More From Author

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *