सिद्धार्थ की 3bhk movie में दिखती है हर मध्यमवर्गीय परिवार की जद्दोजहद। सपनों के घर के लिए 20 साल की जंग, इमोशन्स तो हैं लेकिन कहानी में वो पकड़ नहीं जो दर्शकों को अंत तक बांध सके। सरथकुमार और सिद्धार्थ का सशक्त अभिनय, लेकिन कमजोर पटकथा ने फिल्म का असर हल्का किया। 3bhk movie सिर्फ एक घर नहीं, कई अधूरे सपनों की कहानी है।
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साउथ इंडस्ट्री के मशहूर अभिनेता सिद्धार्थ एक बार फिर बड़े पर्दे पर नजर आए हैं अपनी नई पारिवारिक फिल्म 3BHK के साथ। इस फिल्म को शुरुआत से ही एक इमोशनल फैमिली ड्रामा के रूप में प्रचारित किया जा रहा था। ट्रेलर और टीज़र में फिल्म की कहानी बेहद ज़मीनी और आम दर्शकों से जुड़ने वाली प्रतीत हो रही थी। लेकिन सिनेमाघरों में रिलीज़ के बाद क्या 3BHK वाकई दर्शकों का दिल जीत पाई? चलिए जानते हैं।
3bhk movie कहानी क्या है?
फिल्म की कहानी चेन्नई में रहने वाले मध्यम वर्गीय परिवार पर आधारित है। वासुदेवन (सरथकुमार) का सपना है कि उसका खुद का घर हो। वो अपनी पत्नी शांति (देव्यानी), बेटे प्रभु (सिद्धार्थ) और बेटी आरती (मीथा रघुनाथ) के साथ किराए के घर में रहता है। आर्थिक तंगी के बावजूद वो अपने बेटे प्रभु से उम्मीद करता है कि वो पढ़ाई में अच्छा करके परिवार का सपना पूरा करेगा।
लेकिन जिंदगी बार-बार उनके रास्ते में अड़चनें डालती है। कभी बेटे की पढ़ाई का खर्च, कभी बेटी की शादी, तो कभी अस्पताल के बिल – हर बार उनका सपना दूर होता चला जाता है। क्या वासुदेवन अपने सपनों का 3BHK घर कभी खरीद पाएगा? यही इस कहानी की असल यात्रा है।
फिल्म की खासियत
3bhk movie की कहानी एक आम भारतीय मध्यम वर्गीय परिवार की रोजमर्रा की परेशानियों को दिखाती है, जिससे लाखों लोग खुद को जोड़ सकते हैं। हर किसी के जीवन में घर खरीदना एक सपना होता है, और इस सपने के पीछे की जद्दोजहद को निर्देशक श्री गणेश ने पर्दे पर उतारने की कोशिश की है।
सरथकुमार ने एक जिम्मेदार पिता की भूमिका को गंभीरता और संतुलन के साथ निभाया है। सिद्धार्थ का अभिनय भी ईमानदार है। उनके किरदार में जो बदलाव दिखाया गया है, वो काबिल-ए-तारीफ है। खासकर पिता-पुत्र के बीच के कुछ सीन में भावनाएं अच्छी तरह से उभरकर आती हैं।
राणा दग्गुबाती की आवाज़ में हुआ ओपनिंग नैरेशन भी फिल्म की शुरुआत में जान डालता है। फिल्म में इमोशनल टोन बरकरार रखने की कोशिश की गई है।
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कमज़ोरियां भी साफ नजर आती हैं
हालांकि 3BHK का थीम सच्चा है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमजोरी इसकी कमजोर पटकथा है। कहानी के शुरुआती कुछ मिनटों के बाद ही फिल्म की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। एक ही इमोशन को बार-बार दोहराया गया है, जिससे फिल्म नीरस लगने लगती है।
दूसरे हिस्से में फिल्म पूरी तरह खिंच जाती है। कई सीन ऐसे हैं जो ज़रूरत से ज्यादा लंबे और उबाऊ हैं। निर्देशक की कहानी में नयापन नहीं है। खासतौर पर कई बार फिल्म बोम्मरिल्लू जैसी फिल्मों की याद दिलाती है, जहां सिद्धार्थ ने पहले ही काम किया है। इस वजह से तुलनाएं होना लाजिमी है।
कॉमेडियन योगी बाबू को भी फिल्म में पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया। उनकी भूमिका ऐसी थी कि वो फिल्म में हल्का-फुल्का हास्य ला सकते थे, लेकिन स्क्रिप्ट ने उन्हें मौका ही नहीं दिया। इमोशनल टोन में एकरूपता और कुछ दृश्यों की पूर्वानुमेयता फिल्म को कमजोर बना देती है।
तकनीकी पक्ष
निर्देशक श्री गणेश ने कहानी में जमीनी सच्चाई को उतारने की कोशिश तो की, लेकिन उसे रोमांचक अंदाज में पेश नहीं कर पाए। पटकथा सीधी-सपाट रही और फिल्म का प्रस्तुतीकरण बेजान सा लगा। संगीत भी खास प्रभाव नहीं छोड़ता, हालांकि बैकग्राउंड स्कोर ठीक-ठाक है। सिनेमैटोग्राफी साधारण रही, लेकिन कहानी के अनुरूप माहौल को कैप्चर किया गया। एडिटिंग काफी ढीली है, खासकर दूसरे हिस्से में फिल्म खिंचती चली जाती है।
कुल मिलाकर निष्कर्ष
कुल मिलाकर कहा जाए तो 3bhk movie की शुरुआत एक सच्चे और इमोशनल विषय से होती है, लेकिन इसे सही तरीके से संभाला नहीं गया। कहानी में दम है, पर उसे परदे पर उतारने में पकड़ की कमी साफ नजर आती है। सिद्धार्थ और सरथकुमार ने अपनी ओर से पूरी मेहनत की, लेकिन पटकथा और प्रस्तुतीकरण में वो बात नहीं है, जो दर्शकों को बांध सके। जो फिल्म एक प्यारी और यादगार फैमिली ड्रामा बन सकती थी, वो अंत में एक बोझिल और दोहराव भरा अनुभव बनकर रह जाती है।
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
ट्विटर पर 3bhk movie को लेकर दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ दर्शकों ने इसे दिल छूने वाली और वास्तविकता के करीब बताकर सराहा है। एक यूज़र ने लिखा, “3BHK सिर्फ फिल्म नहीं, कई परिवारों की जिंदगी की कहानी है। सरथकुमार और सिद्धार्थ का अभिनय शानदार है।”
वहीं, कुछ ने इसे ज्यादा इमोशनल और खींची हुई फिल्म बताया। एक अन्य यूज़र ने कहा, “3bhk movie में अच्छी शुरुआत है, लेकिन दूसरा हिस्सा कमजोर है। क्लाइमेक्स ठीक है, लेकिन फिल्म सभी दर्शकों को पसंद आए ये जरूरी नहीं।”
कुछ समीक्षकों ने फिल्म को “स्ट्रक्चर्ड लेकिन बोरिंग” बताया। उनका मानना है कि 3BHK की कहानी में जान तो है, लेकिन पूरी फिल्म एक ही सुर में चलती है, जिससे अंत तक मोनोटनी हावी हो जाती है।
अंत में यही कहा जा सकता है कि 3bhk movie एक सच्ची और साधारण कहानी है, जो कई परिवारों के सपनों को दिखाती है, लेकिन इसे स्क्रीन पर बांधने में फिल्म चूक जाती है। जो दर्शक धीमी रफ्तार की, भावनात्मक फिल्में पसंद करते हैं, उनके लिए ये एक बार देखा जा सकता है, लेकिन जिन्हें नई कहानी और कसावट वाली फिल्म चाहिए, उनके लिए शायद 3BHK संतोषजनक न हो।**
